नेपाल की विद्रोही सेना का डायरेक्टर, जो 1942 के आंदोलन में सरेआम जेल गए, हिंदी साहित्य में किया 'धमाका'

Apr 11, 2026 - 09:46
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नेपाल की विद्रोही सेना का डायरेक्टर, जो 1942 के आंदोलन में सरेआम जेल गए, हिंदी साहित्य में किया 'धमाका'
लंबे समय तक कम्युनिस्ट पार्टी में रहने के बाद फणीश्वरनाथ रेणु काफी बीमार पड़ गए. 1952-53 की इस बीमारी ने उन्हें राजनीति से दूर कर दिया. यही वह अहम मोड़ था जब उन्होंने साहित्य को अपना हथियार बनाया. देश में इमरजेंसी का उन्होंने बहुत ही कड़ा विरोध किया था. 1954 में उनका पहला उपन्यास 'मैला आंचल' सामने आया. इस उपन्यास ने हिंदी साहित्य में एक बहुत बड़ा चमत्कार कर दिया.

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